Saturday, 30 July 2011

बचपन

  बचपन -१


 मैं अब भी
करता हूँ शरारततें
 मिलकर
 अपने बच्चों के साथ,
 बन जाता हूँ
 पूरा का पूरा बच्चा
 जैसा मैं था कभी
 और
 जीता  हूँ अपना
 बचपन
 भरपूर
 इन दिनों भी 

Thursday, 28 July 2011

ये सफर , अच्छे से बेहतर की तलाश में


इंसानियत की ज़द में , उजालों की आस में
ये  सफर ,  अच्छे से बेहतर की तलाश में

किरदार  कैद  हैं  कई , पर्दों  के दरमियाँ
फ़न उनके फ़िर से लाएँ चलो हम उजास में

मिट्टी  के  घरौन्दे  हैं  महलों की ओट में
गिरवी हैं खुशियाँ सारी, महाजन के पास में

संजीदा  बहस  होगी, दिल्ली  में  भूख पर
मुद्दा ये ज़िक्र में  है,  हर आम-ओ-खास में

गुलशन की हवाओं मे ये ,कैसा ज़हर घुला
तितली भी  डर रही  है जाने को पास में

मुद्दत से मौन , ढूंढ रहा क्या है ये हुजूम
खुशियों की चाह है या सुकूं की तलाश में

ये दिल तो बंजारा है


ये दिल तो बंजारा है
सारा जहाँ हमारा है

हिचकी क्यूँ कर आती है
किसने मुझे पुकारा है

एक जगह टिकता ही नहीं
दिल कितना आवारा है

वोह मासूम जो घर पर है
मेरी आँख का तारा है

भीतर मेरे रहता है
जिसका मुझे सहारा है

मौन सुलगता रहता है
भीतर जो अंगारा है

Tuesday, 26 July 2011

यादें भी ले गया ,ज़रा मुस्कान ले गया


यादें भी ले गया ,ज़रा मुस्कान ले गया
मैं उनकी बज़्म से ,कई अरमान ले गया

मै भूल जाऊँ अब उन्हे ,ले ली है ये कसम
मुझसे ही मेरे कत्ल का, फ़रमान ले गया

बाँटा ये किसने झूठ, दगा , ख़ौफ़ ये फ़रेब
बदले मे माँगा कुछ  नहीं,  ईमान ले गया

मेरे  तजुर्बों  से  वो ही , होता है खुदा
हर मुश्किलों से पार ,जो इंसान ले गया

मुद्दत से ये ही सिलसिले ,खामोशियों मे गुम
सपनो को फिर से लूटकर, दरबान ले गया

वो कौन इतनी साज़िशों, विज्ञापनों के बीच
रहकर भी मौन, बज़्म से सम्मान ले गया

सपने खुली आँखों के, सपने नही होते


सपने खुली  आँखों  के,  सपने नही होते
दिल जिनमे दरीचे न हो, अपने नही होते

बचपन का मेरा ख्वाब कहीं,खो गया ऐसे
कुछ सीपियों मे ज्यों कभी मोती नहीं होते

खुशियों के कारोबार पे ,करता है जो यकीं
ये झूठ है कि  ग़म उसे सहने नही होते

हर शख़्स जहाँ भीड़ मे तन्हा सा रहता है
बेशक वो मकां होंगे कभी घर नहीं  होते


मुस्कान चलों बाँट दें कुछ इस जहाँ मे हम

सजदे को खुदा- बुत ही ज़रूरी नही होते

बिछड जाते हैं जिनके दिल मिले हैं


बिछड जाते हैं जिनके दिल मिले हैं
मुहब्बत के ये ही तो  सिलसिले हैं

किया  है प्यार  पहले से ज़ियादा
बिछड के जब ख़यालों मे मिले हैं

कुरेंदे आओ मिलकर ज़ख्म दिल के
हुआ क्या जो वो पहले से छिले हैं

हुए हैं बेखबर खुद से जो यारों
सुना है बस ख़ुदा उनको मिले हैं

चलों बैठे करें कुछ मीठी बातें
भुला दें आज जो शिक़वे गिले हैं

कहूँगा मौन रहकर बात दिल की
पता मुझको है मेरे लब सिले हैं

बात महफ़िल मे वफा की जब उठी


बात महफ़िल मे वफा की जब उठी
तेरे बारे मे ही सोचा देर तक

वक़्त सूरज का ही हर रहता नही
दीप बन करना उजाला देर तक

गीत बन गुलशन मे तुम यूँ गूँजना
गुनगुनाएँ लोग जिसको देर तक

उस जगह तामीर हो तेरा मुकाम
दिख सकें एक दूसरे को देर तक

इक मुकम्मल गज़ल बन जाएँ चलो
याद रक्ख़ेगा ज़माना देर तक