Saturday, 30 July 2011

पूंजी

पूंजी ,


महाजन 
के लिए,
धन- दौलत.


किसी 
बिल्डर के लिए
बेशकीमती ,
ज़मीन का टुकड़ा


ठंड से 
ठिठुरते आदमी 
के लिए 
एक कम्बल


या 


भूखे के लिए
हो सकती हैं
कुछ 
रोटियां भी ....


२१.०१.२०११

शब्द

शब्द - १


शब्द ,
भीतर थे कहीं 


पर 


तुमसे मिलकर ,
शब्द ,
बनकर गीत 
गूंजते हैं 
आकाश में 




शब्द - २ 


शब्द ,
केवल  शब्द 
नहीं होते


एक शब्द के
होते हैं,
कई अर्थ 


शब्द ,केवल 
अर्थों के लिहाज़ से,
 होंगे तुम्हारे लिए   


मेरे लिए तो 
शब्द है............


ढेर सारी सम्भावनाएं 




२१-०१-२०११ 



एक पंछी ढूंढता है फिर बसेरा

एक पंछी ढूंढता है
 फिर बसेरा ........


कल यहीं था आशियाना ,
कह रहा था जल्दी आना
ढूंढता वो फिर रहा है ,
अपना बचपन ,घर पुराना
तोडा जीने ,
क्यूँ न उसका मन झकोरा
एक पंछी ढूंढता है
फिर बसेरा...........


अब न वो रातें हैं अपनी ,
अब न वो बातें हैं अपनी
हम ही थे खुदगर्ज हमने ,
खुद ही लूटी दुनिया अपनी
कुय कहें ,
क्यूँ खो गया अपना सवेरा
एक पंछी ढूंढता है,
फिर बसेरा..........


उसने तो जीवन दिया था,
सांसों में भी दम दिया था
आसमां हो या ज़मी से ,
दाम न उसने लिया था
हमने फिर,
क्यूँ चुन लिया खुद ही अँधेरा
एक पंछी ढूंढता है ,
फिर बसेरा..........


३०.०४.२००९

बचपन

  बचपन -१


 मैं अब भी
करता हूँ शरारततें
 मिलकर
 अपने बच्चों के साथ,
 बन जाता हूँ
 पूरा का पूरा बच्चा
 जैसा मैं था कभी
 और
 जीता  हूँ अपना
 बचपन
 भरपूर
 इन दिनों भी 

Thursday, 28 July 2011

ये सफर , अच्छे से बेहतर की तलाश में


इंसानियत की ज़द में , उजालों की आस में
ये  सफर ,  अच्छे से बेहतर की तलाश में

किरदार  कैद  हैं  कई , पर्दों  के दरमियाँ
फ़न उनके फ़िर से लाएँ चलो हम उजास में

मिट्टी  के  घरौन्दे  हैं  महलों की ओट में
गिरवी हैं खुशियाँ सारी, महाजन के पास में

संजीदा  बहस  होगी, दिल्ली  में  भूख पर
मुद्दा ये ज़िक्र में  है,  हर आम-ओ-खास में

गुलशन की हवाओं मे ये ,कैसा ज़हर घुला
तितली भी  डर रही  है जाने को पास में

मुद्दत से मौन , ढूंढ रहा क्या है ये हुजूम
खुशियों की चाह है या सुकूं की तलाश में

ये दिल तो बंजारा है


ये दिल तो बंजारा है
सारा जहाँ हमारा है

हिचकी क्यूँ कर आती है
किसने मुझे पुकारा है

एक जगह टिकता ही नहीं
दिल कितना आवारा है

वोह मासूम जो घर पर है
मेरी आँख का तारा है

भीतर मेरे रहता है
जिसका मुझे सहारा है

मौन सुलगता रहता है
भीतर जो अंगारा है

Tuesday, 26 July 2011

यादें भी ले गया ,ज़रा मुस्कान ले गया


यादें भी ले गया ,ज़रा मुस्कान ले गया
मैं उनकी बज़्म से ,कई अरमान ले गया

मै भूल जाऊँ अब उन्हे ,ले ली है ये कसम
मुझसे ही मेरे कत्ल का, फ़रमान ले गया

बाँटा ये किसने झूठ, दगा , ख़ौफ़ ये फ़रेब
बदले मे माँगा कुछ  नहीं,  ईमान ले गया

मेरे  तजुर्बों  से  वो ही , होता है खुदा
हर मुश्किलों से पार ,जो इंसान ले गया

मुद्दत से ये ही सिलसिले ,खामोशियों मे गुम
सपनो को फिर से लूटकर, दरबान ले गया

वो कौन इतनी साज़िशों, विज्ञापनों के बीच
रहकर भी मौन, बज़्म से सम्मान ले गया